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लोकार्पण के 15 दिन बाद ही धंसे 22 करोड़ के दो ओवरब्रिज, सड़क भी बही

लोकार्पण के 15 दिन बाद ही धंसे 22 करोड़ के दो ओवरब्रिज, सड़क भी बही

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Harrison Masih

Published Jul 06, 2026 at 12:01

समझें क्या है पूरा मामला छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में 20 से 22 करोड़ रुपए की लागत से…

समझें क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में 20 से 22 करोड़ रुपए की लागत से बने दो रेलवे ओवरब्रिज जून में लोकार्पण के पखवाड़े भर में ही बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। डोंगरगढ़ और राजनांदगांव के बीच बरगा स्थित ओवरब्रिज पर 60 से 70 फीट लंबी दरारें पड़ गई हैं। एक जगह चार फीट चौड़ा गड्ढा हो गया है। आलीवारा के ओवरब्रिज की सड़क बह चुकी है और कई जगह बेस दब गई है। रेलवे अफसर मौके पर नहीं पहुंचे, ग्रामीणों ने हंगामा किया।

पखवाड़े में ही टूट गए करोड़ों के पुल

राजनांदगांव और डोंगरगढ़ के बीच बरगा और आलीवारा में दो रेलवे ओवर ब्रिज बनाए गए थे। इनकी कुल लागत 20 से 22 करोड़ रुपए बताई जाती है।

जून में लोकार्पण हुआ था। अभी पखवाड़े भर भी नहीं बीते थे कि पहली बारिश में ही दोनों पुलों की हालत बिगड़ गई।

रविवार की सुबह बारिश के बाद बरगा पुल पर दरारें और बढ़ गईं। आलीवारा में सड़क का एक हिस्सा पूरी तरह बह गया।

बरगा में 70 फीट की दरार

बरगा ओवरब्रिज पर 60 से 70 फीट लंबी दरारें पड़ गई हैं। इनकी चौड़ाई कई जगह 10 से 12 सेंटीमीटर है।

एक जगह चार फीट तक चौड़ा गड्ढा हो गया है। तस्वीरें साफ बता रही हैं कि नींव कहीं न कहीं कमजोर है।

इंजीनियरिंग की दृष्टि से इतनी जल्दी दरारें पड़ना निर्माण की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े करता है।

आलीवारा पुल की सड़क बह गई

आलीवारा ओवरब्रिज की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। पुल की सड़क खराब हो चुकी है।

किनारे के हिस्से बाउंड्री छोड़ चुके हैं। तीन-चार स्थानों पर पूरा बेस दब चुका है। उसे उखाड़कर बैरिगेट लगाए गए हैं।

ग्रामीणों ने किया हंगामा, अफसर नहीं आए

रविवार को जब दरारें बढ़ने लगीं तो बरगा के ग्रामीण इकट्ठा हो गए। उन्होंने बरसते पानी में काफी देर तक हंगामा किया।

लेकिन रेलवे का कोई अफसर मौके पर नहीं पहुंचा। यह देखकर ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ गया।

ग्रामीणों का कहना था कि जिस पुल का लोकार्पण अभी-अभी हुआ, वह पखवाड़े में ही टूट गया तो आगे क्या होगा।

रेलवे को मीडिया से मिली खबर

इस पूरे मामले में रेलवे का रवैया भी सवालों के घेरे में आ गया है। नागपुर मंडल के पीआरओ यानी जनसंपर्क अधिकारी (PRO – Public Relations Officer) फैज खान ने कहा कि इस संबंध में मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है।

उन्होंने कहा कि अफसरों को इस बारे में अवगत कराया जाएगा। निर्माण में कहां लापरवाही हुई है, जांच कराई जाएगी।

यानी रेलवे को खुद अपने पुलों की हालत मीडिया से पता चली। यह बात अपने आप में बहुत कुछ कह देती है।

निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल

22 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद पखवाड़े में ही पुल टूटना गंभीर सवाल खड़े करता है। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, थर्ड पार्टी ऑडिट और ठेकेदार की जवाबदेही सब पर जांच होनी चाहिए।

फिलहाल रेलवे ने जांच का आश्वासन दिया है। लेकिन जांच कब पूरी होगी और दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी, यह देखना बाकी है।

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