समझें क्या है पूरा मामला
- अलवर के सरकारी अस्पताल में छत से पंखा-प्लास्टर गिरा।
- हादसे में डॉक्टर का सिर फटा, महिला मरीज भी हुई घायल।
- डॉक्टर के सिर पर कई टांके, महिला मरीज की नाक पर 3 टांके।
- PMO बोलीं- बजट होने के बावजूद मरम्मत नहीं हुई।
- 15.5 लाख का बजट मिला, फिर भी नहीं हुई मरम्मत।
सुनील जैन @ अलवर
अलवर के सेटेलाइट हॉस्पिटल में सोमवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे एक दर्दनाक हादसा हो गया। ओपीडी (Outdoor Patient Department) रूम नंबर 7 की छत का भारी प्लास्टर और पंखा गिर गया। जिसमें सीनियर डॉक्टर सीताराम अग्रवाल और उनके सामने बैठी महिला मरीज घायल हो गई।
डॉक्टर का सिर फट गया जिसमें कई टांके लगाने पड़े। महिला मरीज की नाक पर तीन टांके आए और दाहिने हाथ-पैर में भी गंभीर चोटें आईं। पीएमओ (Principal Medical Officer) डॉ. प्रमीला मीणा ने बताया कि यह हादसा टाला जा सकता था अगर सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) ने समय पर मरम्मत कराई होती।
डॉक्टर बोले, बड़ी मुश्किल से बाहर निकल पाए
घायल डॉक्टर सीताराम अग्रवाल ने बताया कि वे सुबह एक महिला मरीज की जांच कर रहे थे तभी अचानक छत से मोटा प्लास्टर और पंखा गिर पड़ा।
हादसे के बाद वे और मरीज बड़ी मुश्किल से कमरे से बाहर निकल पाए। उनके सिर पर गहरी चोट आई जिसके लिए कई टांके लगाने पड़े। उनका इलाज अभी अस्पताल में ही जारी है।
थायरॉयड जांच कराने आई थी टीना
PMO डॉ. प्रमीला मीणा ने बताया कि हादसे के समय 25 साल की टीना थायरॉयड की जांच कराने आई थी। टीना मूल रूप से लक्ष्मणगढ़ की रहने वाली है और फिलहाल कालाकुआं इलाके में रहती है।
टीना की नाक पर गंभीर चोट आई और तीन टांके लगे। दाहिने हाथ और पैर में भी गंभीर चोटें आईं। प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है।
10 महीने से पत्र, 15.5 लाख मंजूर, काम नहीं हुआ
PMO डॉ. प्रमीला मीणा ने PWD पर सीधे उंगली उठाई। उन्होंने बताया कि अस्पताल भवन की जर्जर स्थिति को लेकर पिछले करीब 10 महीनों से PWD को लगातार पत्र लिखे जा रहे हैं।
करीब चार महीने पहले मरम्मत कार्य के लिए लगभग 15 लाख 50 हजार रुपए स्वीकृत कराकर विभाग को भेज दिए गए थे। बजट होने के बावजूद PWD ने मरम्मत नहीं कराई। PMO ने स्पष्ट कहा कि समय रहते मरम्मत होती तो यह हादसा टाला जा सकता था।
हादसे के बाद PWD के अधिकारी पहुंचे
घटना के बाद PWD के अधिकारी मौके पर पहुंचे और भवन का निरीक्षण करने लगे। यह वही विभाग है जो 10 महीने से पत्र मिलने और 15.5 लाख रुपए का बजट मिलने के बाद भी मरम्मत करने नहीं आया था।
यह पहली बार नहीं है
राजस्थान में सरकारी भवनों की जर्जर हालत का यह कोई पहला मामला नहीं है। पहले भी बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ और अन्य जगहों पर सरकारी इमारतों की छतें गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सवाल वही है, बजट होने के बाद भी मरम्मत क्यों नहीं हुई।
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