समझें क्या है पूरा मामला
- सीबीएसई ने कक्षा 9वीं के लिए तीन भाषा नीति लागू कर दी है।
- यह नियम एक जुलाई से प्रभावी हो चुका है।
- छात्रों को अब तीन भाषाएं पढ़नी होंगी।
- इनमें से दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी जरूरी हैं।
- बोर्ड ने अब R3 भाषा असेसमेंट फ्रेमवर्क भी जारी कर दिया है।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने यह अहम बदलाव किया है। कक्षा 9वीं में अब तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य हो गया है। इनमें से दो भाषाओं का भारतीय मूल से जुड़ा होना जरूरी है। बोर्ड ने साफ किया है कि दसवीं में तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।
स्कूल स्तर पर होगा मूल्यांकन
तीसरी भाषा का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर ही होगा। यह पूरी तरह आंतरिक प्रक्रिया रहेगी। इसी को लेकर अब बोर्ड ने विस्तृत फ्रेमवर्क तैयार किया है। सभी संबद्ध स्कूलों को इसका सर्कुलर भेजा गया है।
सर्कुलर में लर्निंग रिसोर्स की उपलब्धता की जानकारी भी दी गई है। बोर्ड ने बताया कि भाषाओं के लिए NCERT का कोर्स अपनाया गया है। यह पाठ्यक्रम ओरल फर्स्ट पेडागॉजी पर आधारित है। इसका मतलब है सुनने और बोलने पर ज्यादा जोर दिया जाएगा।
किस स्किल के कितने अंक
लैंग्वेज असेसमेंट फ्रेमवर्क के अनुसार स्कूल आधारित मूल्यांकन कुल 100 अंकों का होगा। इसमें चार अलग-अलग हिस्से शामिल किए गए हैं। पहला हिस्सा सुनना और बोलना कौशल का है। इसे सबसे ज्यादा 40 अंक दिए गए हैं।
दूसरा हिस्सा क्रिएटिव राइटिंग का है, जिसके लिए 15 अंक तय हैं। तीसरा हिस्सा लर्निंग रिसोर्स पर आधारित मूल्यांकन का है। इसमें रीडिंग स्किल को 20 अंक और राइटिंग स्किल को 10 अंक मिलेंगे। चौथा हिस्सा प्रोजेक्ट वर्क का है, जिसके लिए 15 अंक निर्धारित किए गए हैं।
साल भर होंगी गतिविधियां
सुनने और बोलने के कौशल के लिए आठ अलग-अलग गतिविधियां तय की गई हैं। ये गतिविधियां पूरे शैक्षणिक वर्ष में क्लासरूम में करवाई जाएंगी। हर गतिविधि के लिए पांच अंक निर्धारित हैं। शिक्षकों को किसी एक गतिविधि को चुनने की सलाह दी गई है।
क्रिएटिव राइटिंग का मूल्यांकन भी 15 अंकों में होगा। इससे छात्रों की लेखन क्षमता को परखा जाएगा। बोर्ड का मानना है कि इससे भाषा सीखने का तरीका आसान होगा। छात्रों पर परीक्षा का दबाव भी कम रहेगा।
स्कूलों से मांगा गया फीडबैक
सीबीएसई ने स्कूलों को नया फ्रेमवर्क लागू करने का निर्देश दिया है। साथ ही स्कूलों से सुझाव और फीडबैक भी मांगा गया है। इसका मकसद राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को बेहतर तरीके से लागू करना है।
बोर्ड चाहता है कि यह नीति व्यावहारिक रूप से कारगर साबित हो। इसलिए स्कूलों के अनुभवों को भी अहमियत दी जा रही है। सभी लर्निंग रिसोर्स एनसीईआरटी की वेबसाइट पर उपलब्ध कराए गए हैं। स्कूल और छात्र वहां से इन्हें आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं।
एमपी, राजस्थान, सीजी में असर
यह नियम देशभर के सभी सीबीएसई संबद्ध स्कूलों पर लागू होता है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी सैकड़ों स्कूल सीबीएसई से संबद्ध हैं। इन राज्यों के कक्षा 9वीं छात्रों को भी अब तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। स्कूलों को नया मूल्यांकन ढांचा लागू करना अनिवार्य होगा।
इन राज्यों के शिक्षकों को भी लर्निंग रिसोर्स से जुड़ी जानकारी मिल चुकी है। स्कूल प्रबंधन को सर्कुलर के मुताबिक बदलाव करने होंगे। छात्रों के लिए भाषा सीखना अब पहले से आसान बनाया गया है। सुनना और बोलना कौशल पर खास ध्यान दिया जाएगा।
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