💡 GoCMS Explorer Guide: This homepage uses dynamic server-side rendering for optimal speed. Open any article to view inline newsletter inserts, floating WhatsApp/Telegram floats, and click the ⚡ AMP version at the top! Your page load speed and reading duration are currently tracked under dashboard analytics.
कैदियों की रिहाई पर सिस्टम की कैद! SP की देरी पर गृह विभाग नाराज़

कैदियों की रिहाई पर सिस्टम की कैद! SP की देरी पर गृह विभाग नाराज़

86

VINAY VERMA

Published Jul 06, 2026 at 15:22

समझें क्या है पूरा मामला  127 कैदी रिहाई का इंतजार SP की रिपोर्ट से अटकी फाइलें गृह…

समझें क्या है पूरा मामला 

  • 127 कैदी रिहाई का इंतजार
  • SP की रिपोर्ट से अटकी फाइलें
  • गृह विभाग ने जताई नाराजगी
  • सालभर रिहाई का नियम बेअसर
  • अच्छे आचरण का नहीं मिल रहा लाभ


Raipur। छत्तीसगढ़ की केंद्रीय जेलों में बंद आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी रिहाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं। इन कैदियों ने जेल में अच्छे आचरण का रिकॉर्ड बनाया है और नियमानुसार उनकी समयपूर्व रिहाई की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए थी। लेकिन यह प्रक्रिया पुलिस अधीक्षकों (SP) के स्तर पर अटक गई है। जेल प्रशासन का कहना है कि पुलिस से समय पर रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण रिहाई की फाइलें मुख्यालय तक नहीं पहुंच पा रही हैं।

ऐसे होती है रिहाई की पूरी प्रक्रिया

अच्छे आचरण वाले आजीवन कारावास के कैदियों की रिहाई के लिए जेल अधीक्षक सबसे पहले संबंधित जिले के पुलिस अधीक्षक से राय मांगते हैं। पुलिस अधीक्षक स्थानीय थाने को जांच के निर्देश देते हैं। थाना क्षेत्र में कैदी के सामाजिक माहौल, पीड़ित पक्ष की स्थिति और स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जैसे सरपंच या पार्षद से जानकारी जुटाई जाती है। इसके बाद रिपोर्ट एसपी कार्यालय पहुंचती है और वहां से जेल प्रशासन को भेजी जाती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर गृह विभाग अंतिम फैसला करता है।

थानों से लेकर एसपी कार्यालय तक सुस्त व्यवस्था

जानकारी के मुताबिक, सबसे बड़ी परेशानी इसी चरण में सामने आ रही है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय अक्सर यह जवाब देता है कि संबंधित थाने से रिपोर्ट मांगी गई है और उसके आने का इंतजार है। दूसरी ओर कई थानों में फाइलें महीनों तक पड़ी रहती हैं। कई मामलों में बार-बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद रिपोर्ट तैयार नहीं होती। नतीजा यह होता है कि रिहाई के पात्र कैदी भी वर्षों तक जेल में ही बंद रहते हैं।

गृह विभाग ने दिखाई सख्ती

लगातार मिल रही शिकायतों के बाद अब गृह विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। विभाग ने सभी पुलिस अधीक्षकों को संवेदनशीलता के साथ समय पर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि जिन कैदियों ने जेल में अच्छा आचरण दिखाया है, उन्हें समय पर राहत मिलनी चाहिए। इससे सुधार की भावना को भी बढ़ावा मिलेगा और दूसरे कैदियों के लिए सकारात्मक संदेश जाएगा।

CG में 127 कैदियों की रिहाई SP रिपोर्ट में अटकी

लेकिन व्यवस्था नहीं बदली

पहले अच्छे आचरण वाले कैदियों की रिहाई केवल 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे विशेष अवसरों पर होती थी और उसकी संख्या भी सीमित रहती थी। बाद में सरकार ने नियमों में संशोधन कर यह व्यवस्था खत्म कर दी। अब पात्र कैदियों की रिहाई वर्षभर की जा सकती है ताकि उन्हें छह महीने या उससे अधिक समय तक इंतजार न करना पड़े। लेकिन पुलिस विभाग की धीमी प्रक्रिया के कारण नियम का उद्देश्य ही अधूरा रह गया है।

केंद्रीय जेल में आजीवन कारावास के कैदी

छत्तीसगढ़ में कुल 33 जेल हैं। इनमें 5 केंद्रीय जेल, 20 जिला जेल और 8 उप जेल शामिल हैं। आजीवन कारावास की सजा पाने वाले कैदियों को केवल केंद्रीय जेलों में रखा जाता है। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, अंबिकापुर और जगदलपुर में स्थित केंद्रीय जेलों में ऐसे सभी कैदी निरुद्ध हैं। इन्हीं जेलों से समयपूर्व रिहाई के लिए प्रस्ताव भेजे जाते हैं।

सुधार की नीति पर सुस्ती भारी

सरकार की सुधारात्मक जेल नीति का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि अच्छे आचरण वाले कैदियों का पुनर्वास भी है। यही वजह है कि समयपूर्व रिहाई की व्यवस्था बनाई गई है। लेकिन यदि पुलिस सत्यापन और सामाजिक रिपोर्ट समय पर नहीं भेजेगी तो पूरी प्रक्रिया कागजों में ही सीमित रह जाएगी। इससे न केवल पात्र कैदियों के अधिकार प्रभावित होते हैं, बल्कि जेल सुधार व्यवस्था की मंशा पर भी सवाल खड़े होते हैं।

छत्तीसगढ़ की जेलों की तस्वीर

कुल जेल                       33
केंद्रीय जेल                    5
जिला जेल                      20
उप जेल                         8
रिहाई का इंतजार कर रहे पात्र कैदी 127

IMP FACTS

छत्तीसगढ़ की केंद्रीय जेलों में 127 पात्र कैदी रिहाई का इंतजार कर रहे हैं।

ये सभी आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी हैं।

कैदियों का जेल में अच्छा आचरण दर्ज है।

रिहाई की फाइलें SP की रिपोर्ट नहीं मिलने से अटकी हैं।

जेल अधीक्षक पहले संबंधित जिले के SP से राय मांगते हैं।

SP स्थानीय थाने से सामाजिक और पीड़ित पक्ष की रिपोर्ट मंगाते हैं।

कई थानों में फाइलें महीनों तक लंबित रहती हैं।

गृह विभाग ने सभी SP को समय पर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं।

पहले रिहाई केवल 15 अगस्त और 26 जनवरी जैसे मौकों पर होती थी।

नए नियम के तहत पात्र कैदियों की रिहाई सालभर हो सकती है।

छत्तीसगढ़ में कुल 33 जेल हैं।

इनमें 5 केंद्रीय जेल, 20 जिला जेल और 8 उप जेल हैं।

आजीवन कारावास के कैदी रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, अंबिकापुर और जगदलपुर की केंद्रीय जेलों में रखे जाते हैं।

FAQ

छत्तीसगढ़ में 127 कैदियों की रिहाई क्यों अटकी है?
छत्तीसगढ़ की केंद्रीय जेलों में बंद 127 पात्र कैदियों की समयपूर्व रिहाई पुलिस अधीक्षकों की रिपोर्ट के कारण अटकी है। जेल प्रशासन को संबंधित SP कार्यालय से समय पर सत्यापन रिपोर्ट नहीं मिल रही है।
समयपूर्व रिहाई के लिए SP रिपोर्ट क्यों जरूरी होती है?
SP रिपोर्ट में कैदी के सामाजिक माहौल, पीड़ित पक्ष की स्थिति, थाना जांच और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की राय शामिल होती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर गृह विभाग रिहाई पर अंतिम फैसला करता है।
छत्तीसगढ़ में आजीवन कारावास के कैदी किन जेलों में रखे जाते हैं?
छत्तीसगढ़ में आजीवन कारावास के कैदियों को केवल केंद्रीय जेलों में रखा जाता है। ये केंद्रीय जेल रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, अंबिकापुर और जगदलपुर में स्थित हैं।

यह खबरें भी पढ़े...

छत्तीसगढ़ में भर्ती के नियम बदले, गृह विभाग ने जारी की अधिसूचना

छत्तीसगढ़ के स्कूलों में नया नियम : पहाड़ा नहीं आया तो नपेंगे स्कूल प्रमुख

पुलिस अधीक्षक ट्रांसफर : हितिका वासल का इंदौर देहात एसपी से तबादला, यांगचेन को मिली जिम्मेदारी

सरकारी अस्पतालों में अमानक दवाएं सप्लाई पर आजीवन कारावास की मांग

86

VINAY VERMA

Imported from RSS feed.

Comments (0)

No comments yet. Be the first to share your thoughts.

Leave a Comment

Comments are reviewed before they appear publicly.