समझें क्या है पूरा मामला..
- मूंग खरीदी को लेकर हरदा में किसानों का बड़ा धरना शुरू।
- मंडी में रातभर रुके किसान, खुद बनाया खाना।
- शत प्रतिशत मूंग खरीदी की मांग, सरकार पर दबाव।
- हरदा में किसान संघ का आर-पार का ऐलान।
- 120 किलो खरीदी सीमा से नाराज किसान सड़क पर।
हरदा में भारतीय किसान संघ ने शनिवार से मंडी में धरना शुरू कर दिया। किसान मूंग की शत प्रतिशत खरीदी की मांग कर रहे हैं। सरकार ने प्रति एकड़ सिर्फ 120 किलो मूंग खरीदने का फैसला लिया है। किसानों ने इसे नाकाफी बताया है। धरना अनिश्चितकालीन है और इसे लेकर आंदोलन तेज होने के आसार हैं।
भारतीय किसान संघ पदाधिकारियों का कहना है कि औसतन प्रति हेक्टेयर 15 से 16 क्विंटल मूंग का उत्पादन हो रहा है। लेकिन सरकार प्रति हेक्टेयर सिर्फ सवा क्विंटल ही खरीद रही है। इस बार सरकार ने मूंग का समर्थन मूल्य 8768 रुपए तय किया है।
किसानों का गुस्सा फूटा
हरदा जिला मुख्यालय की कृषि उपज मंडी में शनिवार से माहौल गरम है। भारतीय किसान संघ के बैनर तले सैकड़ों किसान मंडी परिसर में जमा हुए। ये किसान जिले के अलग अलग गांवों से आए थे। सभी की एक ही मांग थी। सरकार मूंग की पूरी फसल समर्थन मूल्य पर खरीदे।
धरने के पहले ही दिन किसानों ने जोरदार नारेबाजी की। सरकार के खिलाफ प्रदर्शन देर शाम तक चलता रहा। किसानों का कहना है कि यह लड़ाई अब सिर्फ मांग तक सीमित नहीं है। यह उनके हक की लड़ाई बन चुकी है।
मंडी में ही बीती रात
आंदोलन की सबसे चर्चित तस्वीर रात के वक्त सामने आई। किसानों ने मंडी परिसर में ही अपना खाना बनाया। चूल्हे जलाकर रोटियां सेंकी गईं। साथ में सब्जी भी तैयार की गई। सैकड़ों किसानों ने वहीं बैठकर भोजन किया।
भोजन के बाद किसान मंडी में ही रुक गए। खुले आसमान के नीचे रातभर विश्राम किया। यह दिखाता है कि किसान इस बार पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।
सिर्फ 120 किलो खरीदी से नाराजगी
किसान संघ के जिला उपाध्यक्ष लवकुश गौर ने साफ कहा कि अब आर-पार की लड़ाई होगी। उनका कहना है कि किसानों ने मेहनत से मूंग की फसल तैयार की थी। उम्मीद थी कि सरकार पूरी उपज खरीदेगी।
लेकिन सरकार ने प्रति हेक्टेयर सिर्फ 1 क्विंटल 20 किलो मूंग खरीदने का फैसला किया। यह मात्रा किसानों की जरूरत से काफी कम है। इसी वजह से किसानों में भारी गुस्सा है।
औसत पैदावार से मेल नहीं खाती सीमा
जिला मंत्री विजय मलगाया ने आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी। उनके मुताबिक हरदा में मूंग की औसत पैदावार 15 से 16 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। ऐसे में सिर्फ 120 किलो प्रति हेक्टेयर खरीदी सीमा उचित नहीं लगती।
उन्होंने कहा कि इस सीमा में खाद, बीज, सिंचाई और मेहनत का सही मूल्य नहीं मिल पाता। कम खरीदी सीमा के चलते किसानों को बाकी उपज मंडी में सस्ते दाम पर बेचनी पड़ती है। मंडी में किसानों को इसी मूंग का दाम केवल 5500 से 6000 ही मिलता है। इससे सीधा आर्थिक नुकसान होता है।
चुनाव में असर की चेतावनी
जिला मंत्री विजय मलगाया ने सरकार को सीधी चेतावनी भी दी। उनका कहना है कि अगर खरीदी सीमा नहीं बढ़ाई गई तो सरकार को आगामी चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। किसानों की नाराजगी अब खुलकर सामने आ चुकी है।
आगे क्या होगा
धरना अनिश्चितकालीन बताया गया है। इसका मतलब है कि जब तक मांग पूरी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा। आने वाले दिनों में और किसानों के जुड़ने की संभावना है। प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई ठोस जवाब सामने नहीं आया है।
ऐसे समझें इस साल मूंग खरीदी का गणित
साल 2026 में मध्य प्रदेश में मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹8,768 प्रति क्विंटल तय किया गया है। मध्य प्रदेश सरकार 'प्राइस सपोर्ट स्कीम' (PSS) के तहत ग्रीष्मकालीन मूंग की सरकारी खरीद कर रही है।
खरीद प्रक्रिया से जुड़े मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- खरीद की अवधि: सरकारी केंद्रों पर मूंग की खरीद 1 जुलाई 2026 से 10 अगस्त 2026 तक चलेगी।
- पंजीकरण: किसानों के लिए पंजीयन 25 मई से 15 जून 2026 तक किया गया था।
- फेस ऑथेंटिकेशन: सही किसान की पहचान और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 'फेस ऑथेंटिकेशन' (चेहरे का सत्यापन) अनिवार्य किया गया है।
- भुगतान: उपज बिकने के बाद सीधे किसानों के बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं।
FAQ
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