समझें क्या है पूरा मामला...
- MP सरकार ने धान पर भावांतर योजना लागू करने का फैसला किया है।
- इससे प्रदेश के साढ़े छह लाख किसानों को फायदा मिलेगा।
- सरकार MSP और बाजार मूल्य के अंतर की राशि देगी।
- मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सिवनी में धान महोत्सव में यह ऐलान किया है।
- पहले से यह योजना सोयाबीन और सरसों किसानों के लिए लागू है।
मध्यप्रदेश सरकार ने धान उत्पादक किसानों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब धान की फसल पर भी भावांतर योजना का फायदा मिलेगा। यह ऐलान खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया है। इससे प्रदेश के साढ़े छह लाख किसान लाभान्वित होंगे। यह घोषणा किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने सिवनी में की बड़ी घोषणा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार, 01 जुलाई को सिवनी जिला मुख्यालय पहुंचे थे। वहां राज्य स्तरीय धान महोत्सव का आयोजन हुआ था। इसी कार्यक्रम में उन्होंने धान पर भावांतर योजना का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की खुशहाली सरकार का संकल्प है। उन्होंने कहा कि किसान समृद्ध होगा तो प्रदेश और देश भी समृद्ध होगा।
मुख्यमंत्री ने महाकौशल क्षेत्र की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र धान उत्पादन के लिए देशभर में मशहूर है। उन्होंने बताया कि छत्रीय धान को अब जीआई टैग (Geographical Indication Tag) मिल गया है। मुख्यमंत्री ने इसे पारंपरिक कृषि का वैश्विक सम्मान बताया।
सोयाबीन के बाद अब धान पर भी किसानों को भावान्तर योजना का लाभ मिलेगा... pic.twitter.com/HX2yCwfvF6
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) July 1, 2026
क्या है भावांतर योजना का फायदा
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार अब एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। धान उत्पादक किसानों को MSP (Minimum Support Price) और बाजार मूल्य के बीच के अंतर की राशि मिलेगी। यानी सरकार सीधे किसानों के खाते में यह अंतर राशि भेजेगी।
इससे पहले प्रदेश में सोयाबीन और सरसों उत्पादक किसानों को भी यही सुविधा मिल चुकी है। अब धान किसानों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा।
इस साल ज्यादा धान खरीदी की उम्मीद
पिछले साल सरकार ने प्रदेश में 51 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा था। अब धान को भावांतर योजना में शामिल करने के बाद तस्वीर बदल सकती है। इस साल इससे भी ज्यादा धान खरीदी होने की संभावना जताई जा रही है। अब तक धान की खरीदी सिर्फ MSP के आधार पर होती थी। इसमें सरकार को काफी बड़ी व्यवस्था करनी पड़ती थी।
गोदाम, बारदाना और परिवहन जैसी कई प्रक्रियाएं पूरी करनी होती थीं। इसके अलावा शिकायतें भी लगातार आती रहती थीं। कई बार वेयरहाउस में घटिया धान पहुंचने की बात सामने आती थी। इन सभी गड़बड़ियों को देखते हुए सरकार ने अब भावांतर योजना को बेहतर विकल्प माना है।
धान खरीदी में गड़बड़ी रुकने का दावा
सरकार का मानना है कि इस बदलाव से कई फायदे होंगे। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हैंडलिंग और बारदाना खरीदी जैसी प्रक्रियाएं नहीं करनी पड़ेंगी। सरकार का दावा है कि इससे धान खरीदी से जुड़े घोटाले भी रुकेंगे। पहले खरीदी केंद्रों पर होने वाली गड़बड़ियों की शिकायतें आम थीं।
अब किसान अपनी मर्जी से कहीं भी अपनी धान बेच सकेगा। उसे सरकारी खरीदी केंद्र पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। सरकार सिर्फ MSP और बाजार मूल्य के अंतर की राशि उसके खाते में डाल देगी। इससे किसान को बेहतर कीमत और आसान प्रक्रिया दोनों का फायदा मिलेगा।
कोदो-कुटकी किसानों को भी मिला बोनस
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने एक और बड़ी घोषणा की। रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना के तहत किसानों को बोनस दिया गया। प्रदेश के तीन हजार 941 किसानों को कोदो-कुटकी की खेती पर बोनस मिला। यह बोनस एक हजार रुपए प्रति क्विंटल की दर से दिया गया। कुल मिलाकर दो करोड़ 84 लाख रुपए किसानों के खातों में भेजे गए। यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। इससे परंपरागत फसलों की खेती करने वाले किसानों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
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