
समझें क्या है पूरा मामला
- ₹199 में परिवार का सदस्य जोड़ने-हटाने का दावा, ₹9 में समग्र प्रिंट उपलब्ध।
- बिना OTP समग्र रिकॉर्ड में बदलाव और पारिवारिक जानकारी डाउनलोड हो रही।
- जबलपुर की महिला का पूरा परिवार बिना आवेदन ग्वालियर शिफ्ट, वास्तविक सदस्यों की जगह दूसरे नाम जुड़े।
- आयुष्मान, राशन, पेंशन, छात्रवृत्ति और लाड़ली बहना जैसी योजनाओं पर बड़ा खतरा।
- विशेषज्ञों ने साइबर फॉरेंसिक जांच, एक्सेस लॉग ऑडिट और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई।
मध्य प्रदेश की डिजिटल पहचान पर सबसे बड़ा सवाल
मध्य प्रदेश में समग्र आईडी केवल एक पहचान संख्या नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के सरकारी अधिकारों की आधारशिला है। स्कूल में प्रवेश से लेकर छात्रवृत्ति, राशन, पेंशन, संबल योजना, लाड़ली बहना योजना, आयुष्मान भारत योजना और सरकारी नौकरियों तक लगभग हर सरकारी प्रक्रिया समग्र आईडी पर आधारित है।
ऐसे में यदि इसी सिस्टम में बिना वैधानिक अनुमति के बदलाव संभव हो जाएं, तो यह केवल तकनीकी खामी नहीं बल्कि पूरे डिजिटल गवर्नेंस सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पड़ताल में सामने आया चौंकाने वाला नेटवर्क
द सूत्र की पड़ताल में एक ऐसी निजी वेबसाइट सामने आई, जो समग्र आईडी से जुड़े कई संवेदनशील बदलाव कर रही है। सबसे गंभीर बात यह है कि जिन सेवाओं के लिए सरकारी पोर्टल पर लाभार्थी के मोबाइल पर आने वाले OTP का सत्यापन अनिवार्य माना जाता है, वही सेवाएं इस प्लेटफॉर्म पर कुछ घंटों में बिना OTP के उपलब्ध कराई जा रही हैं। एक निजी वेबसाइट को मिला इस हद का एक्सेस एमपी समग्र पोर्टल की सुरक्षा व्यवस्था पर सबसे बड़ा प्रश्नचिह्न है।
जबलपुर की महिला का परिवार पहुंच गया ग्वालियर
पूरे मामले की जांच के दौरान जबलपुर निवासी निशा सोनी का मामला सामने आया। उन्हें पता चला कि उनका पूरा परिवार समग्र आईडी बिना किसी आवेदन के ग्वालियर स्थानांतरित हो चुकी है। इतना ही नहीं, परिवार के वास्तविक सदस्यों की जगह दूसरे लोगों के नाम दर्ज कर दिए गए। यदि यह परिवर्तन वास्तव में उनकी जानकारी और सहमति के बिना हुआ है, तो यह केवल रिकॉर्ड की त्रुटि नहीं बल्कि पहचान बदलकर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की आशंका वाला गंभीर मामला बन सकता है।
₹9 में समग्र प्रिंट, ₹199 में बदल रहे परिवार
जांच के दौरान सामने आया कि mpvala.com नाम की वेबसाइट मास्टर और डिस्ट्रीब्यूटर आईडी के माध्यम से समग्र पोर्टल से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध करा रही है। वेबसाइट पर ₹9 में समग्र आईडी प्रिंट और ₹199 में परिवार का सदस्य जोड़ने या हटाने जैसी सेवाएं दिखाई दीं।
द सूत्र ने इस साइट की पड़ताल की, जिसमें सामने आया कि कुछ ऐसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं जो सामान्य परिस्थितियों में सरकारी कार्यालयों में भी बिना OTP के संभव नहीं होतीं। इससे सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि सीमित सरकारी एक्सेस वाला डेटा निजी प्लेटफॉर्म तक आखिर पहुंचा कैसे।
आयुष्मान योजना में करोड़ों रुपए के फर्जीवाड़े की आशंका
इस कथित नेटवर्क का सबसे गंभीर असर आयुष्मान भारत योजना पर पड़ सकता है। जांच के दौरान निशा सोनी के परिवार का रिकॉर्ड देखने पर पाया गया कि परिवार को दूसरे जिले में स्थानांतरित कर वास्तविक सदस्यों की जगह अन्य व्यक्तियों के नाम दर्ज किए गए थे। यदि ऐसे लोग आयुष्मान योजना के लाभार्थी बन जाते हैं, तो सरकारी खर्च पर इलाज कोई और करा सकता है, जबकि वास्तविक पात्र परिवार इलाज से वंचित रह सकता है। यही कारण है कि यह मामला केवल डेटा परिवर्तन नहीं बल्कि सरकारी धन के बड़े दुरुपयोग की आशंका भी पैदा करता है।
ऑफ रिकॉर्ड कियोस्क संचालकों का बड़ा दावा
मामले में कुछ कियोस्क संचालकों से भी बातचीत की गई। कैमरे पर उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार किया। वहीं ऑफ रिकॉर्ड उन्होंने दावा किया कि कथित तौर पर इसी तरह की व्यवस्था के जरिए आयुष्मान कार्ड 20 हजार से 30 हजार रुपए प्रति व्यक्ति तक बेचे जा रहे हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन यदि जांच एजेंसियां इन्हें सही पाती हैं तो यह सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं में संगठित आर्थिक अपराध साबित हो सकता है।
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बिना OTP डाउनलोड हो रही पारिवारिक जानकारी?
पड़ताल में यह भी सामने आया कि इस वेबसाइट पर बिना OTP सत्यापन के परिवार समग्र आईडी डाउनलोड करने का विकल्प उपलब्ध है। यदि ऐसा वास्तव में संभव है, तो कोई भी व्यक्ति मामूली शुल्क देकर किसी भी परिवार की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकता है। इससे नागरिकों की निजता, व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न होता है।
एक क्लिक में शादीशुदा महिला 'विधवा', पुरुष 'विधुर'?
सबसे चौंकाने वाला दावा उस विकल्प को लेकर सामने आया, जिसमें किसी विवाहित महिला को विधवा और विवाहित पुरुष को विधुर दर्ज करने की सुविधा दिखाई गई। यदि बिना सक्षम प्राधिकारी की जांच और वैध दस्तावेजों के ऐसा परिवर्तन संभव है, तो इससे पेंशन, उत्तराधिकार, संपत्ति विवाद, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और न्यायालयों में लंबित मामलों तक प्रभावित हो सकते हैं।
समग्र आईडी क्यों है इतनी महत्वपूर्ण?
समग्र आईडी मध्य प्रदेश में सरकारी योजनाओं का सबसे जरूरी आधार बन चुकी है। परिवार समग्र आईडी में पूरे परिवार की जानकारी रहती है, जबकि सदस्य समग्र आईडी हर व्यक्ति की अलग पहचान होती है।
एमपी की लाड़ली बहना योजना, लाड़ली लक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत, छात्रवृत्ति, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, संबल योजना, भूमि रिकॉर्ड लिंकिंग और सरकारी नौकरियों जैसी कई जरूरी सेवाएं समग्र आईडी से जुड़ी हैं।
यानी अगर समग्र रिकॉर्ड में गड़बड़ी या छेड़छाड़ होती है, तो इसका सीधा असर लोगों के हक और सरकारी लाभों पर पड़ सकता है।
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एक बदलाव... और खुल सकते हैं करोड़ों के घोटालों के रास्ते
यदि समग्र रिकॉर्ड में अनधिकृत बदलाव संभव हैं, तो इसका दुरुपयोग केवल आयुष्मान योजना तक सीमित नहीं रहेगा। राशन, पेंशन, छात्रवृत्ति, लाड़ली बहना, संबल योजना और अन्य सरकारी सहायता गलत लोगों तक पहुंच सकती है। परिवार से किसी सदस्य का नाम हटाकर भविष्य में उत्तराधिकार विवाद खड़े किए जा सकते हैं। जन्मतिथि और पारिवारिक विवरण बदलकर आगे दूसरे दस्तावेजों के सत्यापन को भी प्रभावित किया जा सकता है।
लाड़ली बहना योजना पर भी पड़ सकता है असर
यदि किसी पात्र महिला का नाम परिवार से अलग कर दिया जाए या उसके समग्र रिकॉर्ड में बदलाव कर दिया जाए, तो उसकी लाड़ली बहना योजना की पात्रता प्रभावित हो सकती है। इसी प्रकार छात्रवृत्ति, कन्या विवाह योजना और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में भी गलत लाभार्थी शामिल होने या वास्तविक पात्रों के वंचित होने का खतरा बढ़ जाता है।
साइबर अपराधियों के लिए 'सोने की खान' बन सकता है डेटा
पड़ताल में ₹50 में आधार नंबर के जरिए पैन संबंधी जानकारी मिलने और बिना OTP पारिवारिक जानकारी डाउनलोड होने जैसे दावे भी सामने आए। यदि ऐसे डेटा का दुरुपयोग होता है, तो पहचान चोरी (Identity Theft), बैंकिंग फ्रॉड, फर्जी सिम, सोशल इंजीनियरिंग और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे साइबर अपराध कई गुना बढ़ सकते हैं।
सबसे बड़ा सवाल - सिस्टम में सेंध या अंदरूनी मिलीभगत?
अब सबसे अहम प्रश्न यही है कि आखिर यह कथित एक्सेस निजी वेबसाइट तक पहुंचा कैसे? क्या समग्र पोर्टल की सुरक्षा में सेंध लगी है? क्या किसी अधिकृत लॉगिन का दुरुपयोग किया जा रहा है? या फिर किसी स्तर पर अंदरूनी मिलीभगत से यह सुविधा उपलब्ध कराई गई? इन सवालों का जवाब केवल निष्पक्ष साइबर फॉरेंसिक जांच, एक्सेस लॉग ऑडिट और तकनीकी परीक्षण से ही सामने आ सकता है।
MPSEDC द्वारा डिजाइन पोर्टल और वही अनजान
सवाल यह है कि आखिर एक निजी वेबसाइट समग्र पोर्टल के डेटाबेस तक पहुंच कैसे बना रही है। यह जानने के लिए हमने MPSEDC के एमडी आशीष वशिष्ठ से संपर्क करने की कोशिश की।
इसके बाद MPSEDC के CoE इंद्र बिसेन का फोन हमारे पास आया। उन्होंने साफ कहा कि इस वेबसाइट या किसी भी दूसरी वेबसाइट को इस तरह का एक्सेस नहीं दिया गया है।
बिसेन ने हमसे संबंधित वेबसाइट की जानकारी मांगी है और कहा कि इस मामले में जल्द अपडेट दिया जाएगा।
जरूरी है तत्काल उच्चस्तरीय जांच
विशेषज्ञों का मानना है कि संबंधित वेबसाइट, उसके सर्वर, लॉग्स और समग्र पोर्टल के एक्सेस रिकॉर्ड की तत्काल फॉरेंसिक जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही जिन नागरिकों की समग्र आईडी में बिना उनकी जानकारी के परिवर्तन हुए हैं, उनके रिकॉर्ड तत्काल बहाल किए जाएं और यदि जांच में आरोप सही साबित हों तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। क्योंकि यदि समय रहते इस कथित नेटवर्क पर रोक नहीं लगी, तो करोड़ों नागरिकों की पहचान, सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और मध्य प्रदेश की पूरी डिजिटल गवर्नेंस व्यवस्था गंभीर संकट में पड़ सकती है।
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