💡 GoCMS Explorer Guide: This homepage uses dynamic server-side rendering for optimal speed. Open any article to view inline newsletter inserts, floating WhatsApp/Telegram floats, and click the ⚡ AMP version at the top! Your page load speed and reading duration are currently tracked under dashboard analytics.
एमपी में 74 करोड़ का सरसों तेल घोटाला: CBI के शिकंजे में KS Oils और STC के पूर्व अफसर

एमपी में 74 करोड़ का सरसों तेल घोटाला: CBI के शिकंजे में KS Oils और STC के पूर्व अफसर

65

Amresh Kushwaha

Published Jul 06, 2026 at 12:30

समझें क्या है पूरा मामला... CBI ने मुरैना की KS Oils के खिलाफ केस दर्ज किया है। यह मामला 74.77…

समझें क्या है पूरा मामला...

  • CBI ने मुरैना की KS Oils के खिलाफ केस दर्ज किया है।
  • यह मामला 74.77 करोड़ रुपए के घोटाले से जुड़ा है।
  • STC को सरसों तेल सप्लाई में भारी नुकसान हुआ था।
  • जांच में टैंकों में तेल की जगह पानी मिला था।
  • कंपनी के चेयरमैन समेत 12 लोगों पर आरोप लगे हैं।

क्या है पूरा घोटाला

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी CBI ने सरसों तेल कारोबार में बड़ा घोटाला पकड़ा है। यह मामला मुरैना की कंपनी KS Oils Limited से जुड़ा है। आरोप है कि साल 2010 से 2014 के बीच यह फर्जीवाड़ा हुआ था। इसमें राज्य व्यापार निगम यानी STC को भारी नुकसान पहुंचाया गया। CBI ने कंपनी के तत्कालीन चेयरमैन रमेशचंद्र गर्ग समेत 12 लोगों पर केस दर्ज किया है।

कैसे मिली फाइनेंस सुविधा

CBI की FIR (First Information Report) के अनुसार KS Oils ने STC से एक खास सुविधा ली थी। यह ट्रेड फाइनेंस सुविधा 75 करोड़ रुपए की थी। इसके जरिए कंपनी को सरसों तेल खरीदना था। जांच में पता चला कि कंपनी की साख ठीक से जांची नहीं गई। इसके बावजूद यह सुविधा मंजूर कर दी गई। बाद में हालात और भी बिगड़ गए।

स्वीकृति से ज्यादा जारी हुए LC

STC ने 75 करोड़ की तय सीमा से भी ज्यादा राशि जारी कर दी। यह राशि लगभग 83 करोड़ 30 लाख रुपए के LC (Letter of Credit) के रूप में थी। जांच में दो कंपनियों के नाम भी सामने आए। इनके नाम चंबल वैली एग्रो प्रोडक्ट्स और ग्वालियर कमोडिटीज बताए गए हैं। CBI का दावा है कि यह दोनों असल में शेल कंपनियां थीं। इन्हें KS Oils के प्रबंधन से ही नियंत्रित किया जा रहा था। इन्हीं कंपनियों के जरिए पैसा वापस KS Oils के खातों में पहुंचा दिया गया।

टैंकों में मिला सिर्फ पानी

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा भंडारण जांच में हुआ। मुरैना और गुना के टैंकों में सरसों तेल रखा जाना था। इसकी निगरानी का जिम्मा स्टार एग्री वेयरहाउसिंग एंड कोलेटरल मैनेजमेंट लिमिटेड के पास था। इस एजेंसी ने पहले तेल का स्टॉक प्रमाणित भी कर दिया था। वहीं सितंबर 2012 में हुए निरीक्षण में हकीकत सामने आ गई। टैंकों में तेल की जगह 90 प्रतिशत से ज्यादा पानी मिला। यह पूरे घोटाले की सबसे बड़ी कड़ी मानी जा रही है।

समय पर नहीं हुआ भुगतान

FIR के मुताबिक KS Oils तय समय पर भुगतान नहीं कर सकी। कंपनी स्टॉक का निस्तारण भी समय पर नहीं कर पाई। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई सख्त कदम नहीं उठाया। इसके उलट उन्होंने कंपनी को बार बार समय बढ़ाकर दिया। CBI का मानना है कि इसी लापरवाही से STC को नुकसान बढ़ता गया। आखिर में यह नुकसान 74.77 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

किन पर लगे हैं आरोप

CBI ने इस मामले में कुल 12 लोगों को आरोपी बनाया है। इसमें STC के तत्कालीन CMD (Chairman cum Managing Director) एन.के. माथुर शामिल हैं। इसके अलावा निदेशक मनोज कुमार मिश्रा और खलील रहीम भी आरोपी हैं। महाप्रबंधक बी. वेंकटरम, बी.बी. साहा और समीर कौल का नाम भी शामिल है। KS Oils के चेयरमैन रमेशचंद्र गर्ग और निदेशक दवेश अग्रवाल पर भी केस दर्ज है। स्टार एग्री वेयरहाउसिंग कंपनी और उसके निदेशक अमित खंडेलवाल भी आरोपी बनाए गए हैं। CBI ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं लगाई हैं।

आगे क्या होगा असर

अब CBI इस पूरे मामले की गहराई से जांच करेगी। एजेंसी सभी आरोपियों से पूछताछ कर सकती है। कंपनी के दस्तावेजों और बैंक खातों की जांच भी होगी। शेल कंपनियों की भूमिका पर भी विशेष फोकस रहेगा। STC को हुए नुकसान की भरपाई पर भी सवाल उठेगा। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।

यह खबर क्यों जरूरी है

यह खबर सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़ी है। सरकारी उपक्रमों में पारदर्शिता और जवाबदेही बहुत जरूरी है। जब सरकारी संस्थान जैसे STC को नुकसान होता है, तो इसका असर जनता के पैसे पर पड़ता है। शेल कंपनियों के जरिए फर्जीवाड़ा करना गंभीर आर्थिक अपराध है।

यह मामला बैंकिंग और वित्तीय निगरानी व्यवस्था की कमजोरी भी दिखाता है। CBI जैसी एजेंसी की कार्रवाई से भ्रष्टाचार पर रोक लगने की उम्मीद बढ़ती है। यह खबर आर्थिक अपराध, कानून के राज और सुशासन से जुड़े मूल्यों के लिए भी महत्वपूर्ण है। जनता को यह जानने का अधिकार है कि सरकारी संस्थानों का पैसा कैसे खर्च हुआ।

ये खबरें भी पढ़िए...

एमपी टीईटी विवाद: 70 हजार शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से बचाने सरकार जाएगी SC

मध्यप्रदेश विधानसभा मानसून सत्र में गूंजेंगी आपकी आवाज: कांग्रेस ने मांगे सवाल

एमपी सरकार ने डीआरपी पॉलिसी में किया बदलाव, अब डीन संभालेंगे पोस्टिंग का जिम्मा

MP News: मानसून पड़ा धीमा, चपेट में आए 24 जिले, सीएम का गृह संभाग ज्यादा सूखा

65

Amresh Kushwaha

Imported from RSS feed.

Comments (0)

No comments yet. Be the first to share your thoughts.

Leave a Comment

Comments are reviewed before they appear publicly.