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पेंच टाइगर रिजर्व में जंगल बुक के बघीरा की एक झलक देखने लोग घंटों कर रहे इंतजार

By Amresh Kushwaha | Jul 06, 2026
समझें क्या है पूरा मामला... पेंच टाइगर रिजर्व में अब बघीरा पर्यटकों की पहली पसंद बन…

समझें क्या है पूरा मामला...

बघीरा बना नया आकर्षण

मध्यप्रदेश का पेंच टाइगर रिजर्व अपनी सुपर मॉम बाघिन की वजह से पहले से मशहूर रहा है। अब यहां चार ब्लैक पैंथर की मौजूदगी नई पहचान बन गई है। पर्यटक इन्हें प्यार से बघीरा बुलाते हैं। यह नाम जंगल बुक के मशहूर किरदार से लिया गया है। जैसे ही जंगल में बघीरा के दिखने की खबर फैलती है, सफारी गाइड और पर्यटक उत्साहित हो जाते हैं।

वनकर्मी बताते हैं कि उसकी मौजूदगी की सूचना किसी वीआईपी मूवमेंट से कम नहीं होती। वन विभाग अब बघीरा को पेंच की नई यूएसपी (Unique Selling Proposition) के तौर पर विकसित करने में जुटा है। पेंच के डिप्टी डायरेक्टर पुनीत गोयल कहते हैं कि पर्यटकों में ब्लैक पैंथर को लेकर खास आकर्षण है। उनका मानना है कि आने वाले समय में यह पेंच की ब्रांडिंग का बड़ा हिस्सा बन सकता है।

क्यों काला है यह तेंदुआ

कई लोग सोचते हैं कि ब्लैक पैंथर तेंदुए से अलग जानवर है। वहीं, असलियत कुछ और है। वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. सुदेश बाघमारे इसे साफ करते हैं। उनके मुताबिक ब्लैक पैंथर कोई अलग प्रजाति नहीं है। यह सामान्य तेंदुए का ही एक दुर्लभ रूप है। इसके पीछे मेलानिज्म नाम की आनुवंशिक स्थिति काम करती है।

इस स्थिति में शरीर में मेलानिन पिगमेंट सामान्य से ज्यादा बनने लगता है। मेलानिन वही पदार्थ है जो त्वचा और बालों को काला रंग देता है। जब यह ज्यादा बनता है, तो तेंदुए का पूरा शरीर काला दिखने लगता है। इसलिए इसे अलग जानवर मानना सही नहीं है। यह प्रकृति का एक दुर्लभ खेल है, नई प्रजाति नहीं।

पर्यटकों की पहली पसंद

पेंच के नेचुरलिस्ट इमरान खान के मुताबिक रिजर्व में चार ब्लैक पैंथर मौजूद हैं। इनमें से एक कोर एरिया में रहता है। दो बफर जोन के उस हिस्से में घूमते हैं, जहां पर्यटक नहीं जा सकते। एक ब्लैक पैंथर महाराष्ट्र वाले जंगल की तरफ चला गया है।

इमरान खान बताते हैं कि सफारी पर आने वाले हर पर्यटक की पहली जिज्ञासा बघीरा को देखने की होती है। लोग बाघ से पहले ब्लैक पैंथर के बारे में पूछते हैं। कई पर्यटक तो सिर्फ इसी उम्मीद में कई-कई घंटे सफारी में बैठे रहते हैं। गाइड भी अब रूट प्लान करते समय इसका खास ध्यान रखते हैं। इससे साफ है कि बघीरा ने बाघ की लोकप्रियता को भी टक्कर देना शुरू कर दिया है।

स्वस्थ जंगल की निशानी

ब्लैक पैंथर का दिखना सिर्फ एक अच्छी तस्वीर भर नहीं है। यह जंगल की सेहत का भी संकेत है। जिस इलाके में यह पाया जाता है, वहां का इकोसिस्टम बेहतर माना जाता है। इसकी मौजूदगी बताती है कि खाने की चेन ठीक तरह काम कर रही है। साथ ही यह इलाके की समृद्ध जैव विविधता को भी दर्शाता है।

वन विभाग इसे वन्यजीव संरक्षण की एक बड़ी कामयाबी मानता है। पेंच पहले से बाघों और मोगली की कहानियों के कारण दुनिया में जाना जाता है। अब ब्लैक पैंथर की मौजूदगी इस पहचान को और मजबूत कर रही है।

अफसरों का क्या कहना है

पीसीसीएफ (Principal Chief Conservator of Forest) वाइल्ड लाइफ समीता राजौरा भी इस बदलाव को अहम मानती हैं। उनके मुताबिक ब्लैक पैंथर की मौजूदगी जंगल के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का सबूत है। उनका कहना है कि पेंच में इसकी साइटिंग वन्यजीव संरक्षण की सफलता दिखाती है। वे बताती हैं कि पेंच पहले से बाघों और मोगली के कारण खास पहचान रखता है।

अब बघीरा इस पहचान में एक नया अध्याय जोड़ रहा है। वन विभाग की कोशिश है कि आगे भी इस दुर्लभ तेंदुए का संरक्षण ठीक तरीके से हो। इसके लिए बफर और नॉन-टूरिज्म जोन में खास निगरानी रखी जा रही है। अफसरों का मानना है कि सही योजना से पेंच की टूरिज्म ग्रोथ और तेज हो सकती है।

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