समझें क्या है पूरा मामला...
- मप्र वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्य शामिल किए गए हैं।
- इसके विरोध में मुस्लिम संगठन भोपाल में सड़क पर उतर गए हैं।
- प्रदर्शनकारियों ने सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की है।
- मंत्री विश्वास सारंग ने इस फैसले का बचाव किया है।
- हिंदू संगठन ने इस नियुक्ति का स्वागत किया है।
सोमवार, 06 जुलाई को राजधानी भोपाल के बुधवारा चौराहे पर एक बड़ा प्रदर्शन हुआ। ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के पदाधिकारी सड़क पर उतर आए। उनका विरोध मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर था। प्रदर्शनकारियों ने इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग रखी। उनका कहना था कि इससे मुस्लिम समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।
क्यों उठी विरोध की मांग
ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने प्रदर्शन में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वक्फ मुस्लिम समाज की धार्मिक संस्था है। लोग अपनी संपत्ति अल्लाह की रजा के लिए वक्फ करते हैं। उनका कहना था कि इसके प्रबंधन में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति ठीक नहीं है।
उन्होंने अयोध्या, सोमनाथ और मथुरा की धार्मिक संस्थाओं का भी जिक्र किया। उनका सवाल था कि मुस्लिम समाज ने कभी उन संस्थाओं में प्रतिनिधित्व नहीं मांगा। फिर वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्य शामिल करने की जरूरत क्यों पड़ी।
जल्दबाजी में गठन का आरोप
शमशुल हसन ने आरोप लगाया कि नया कानून लागू होते ही जल्दबाजी में बोर्ड बनाया गया है। उनका कहना था कि नए सदस्यों की नियुक्ति करनी ही थी तो मुस्लिम समाज के योग्य लोगों को मौका मिलना चाहिए था। उन्होंने सेवानिवृत्त आईएएस (Indian Administrative Service), आईपीएस (Indian Police Service), डॉक्टर और इंजीनियर जैसे विशेषज्ञों का नाम लिया। उनका मानना था कि इन लोगों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए थी।
CM के पोस्टर के साथ नारेबाजी
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता मुख्यमंत्री मोहन यादव के पोस्टर लेकर पहुंचे। उन्होंने पोस्टर के जरिए नियुक्ति का विरोध जताया। इसे उन्होंने सरकार का सीधा हस्तक्षेप बताया। प्रदर्शनकारियों ने वक्फ बोर्ड में तानाशाही नहीं चलेगी जैसे नारे लगाए। इस दौरान अयोध्या से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र हुआ। सरकार के फैसले के खिलाफ जमकर
हिंदू संगठन ने किया स्वागत
श्री हिंदू उत्सव समिति एवं संस्कृति बचाओ मंच ने इस नियुक्ति का स्वागत किया है। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने अपनी राय रखी। उनका कहना था कि इससे वक्फ बोर्ड में पारदर्शिता आएगी। उन्होंने कहा कि अब बोर्ड की गतिविधियों पर सबकी निगरानी रहेगी। उनके मुताबिक हिंदू सदस्यों के आने से बोर्ड निष्पक्ष तरीके से काम करेगा। उनका मानना था कि इससे संपत्तियों के प्रबंधन में जवाबदेही भी बढ़ेगी।
नारेबाजी की गई।
सरकार से वापसी की मांग
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वक्फ संपत्तियां समाज की अमानत हैं। इनके प्रबंधन में भरोसेमंद लोगों को ही शामिल किया जाना चाहिए। उनका दावा था कि इस फैसले से मुस्लिम समाज में गहरी नाराजगी है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी भी दी। यदि फैसला वापस नहीं हुआ तो आंदोलन पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा।
मंत्री सारंग का जवाब
मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश वक्फ कानून 2026 लागू करने वाला पहला राज्य बना है। उनके मुताबिक यह गर्व की बात है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव और वक्फ बोर्ड अध्यक्ष को बधाई दी।
सारंग ने कहा कि वक्फ बोर्ड को मस्जिद प्रबंधन समिति से जोड़ना गलत है। उनका कहना था कि बोर्ड की जिम्मेदारियां कहीं ज्यादा व्यापक हैं। उन्होंने इस मुद्दे को धार्मिक नजरिए से न देखने की बात कही। मंत्री ने बताया कि यह कानून संसद में चर्चा के बाद पारित हुआ है। उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उनका कहना था कि जो लोग संविधान की रक्षा की बात करते हैं, वही अब इस कानून का विरोध कर रहे हैं।
हिंदू संगठन ने किया स्वागत
श्री हिंदू उत्सव समिति एवं संस्कृति बचाओ मंच ने इस नियुक्ति का स्वागत किया है। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने अपनी राय रखी। उनका कहना था कि इससे वक्फ बोर्ड में पारदर्शिता आएगी। उन्होंने कहा कि अब बोर्ड की गतिविधियों पर सबकी निगरानी रहेगी। उनके मुताबिक हिंदू सदस्यों के आने से बोर्ड निष्पक्ष तरीके से काम करेगा। उनका मानना था कि इससे संपत्तियों के प्रबंधन में जवाबदेही भी बढ़ेगी।
आगे क्या होगा असर
अब यह देखना होगा कि सरकार प्रदर्शनकारियों की मांग पर क्या रुख अपनाती है। मुस्लिम संगठन पहले ही आंदोलन तेज करने की चेतावनी दे चुके हैं। दूसरी तरफ हिंदू संगठन इस फैसले के समर्थन में खड़े हैं। इससे यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है। वक्फ बोर्ड से जुड़ी यह बहस पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन सकती है।
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